BlogLife StyleNationalState

धमदाहा के 15 शहीदों की अमर गाथा, 25 अगस्त को याद किया जाता है आजादी का बलिदान –  धमदाहा, पूर्णिया ।

धमदाहा, पूर्णिया : आजादी की लड़ाई का इतिहास केवल बड़े शहरों और आंदोलनों तक सीमित नहीं रहा। बिहार के पूर्णिया जिले के धमदाहा की धरती ने भी स्वतंत्रता संग्राम में अपना अमिट योगदान दिया। वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान धमदाहा में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ हुए आंदोलन में 15 वीर सपूतों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी।

शहीद अमर जवान

स्थानीय इतिहास के अनुसार, अंग्रेजी शासन के खिलाफ आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में क्रांतिकारी धमदाहा थाना परिसर पहुंचे थे। आंदोलनकारियों का उद्देश्य अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती देना और थाना परिसर में तिरंगा फहराना था।
आंदोलनकारियों के इस प्रयास को रोकने के लिए अंग्रेजी पुलिस ने गोलीबारी कर दी। गोलियों के सामने भी आजादी के दीवानों का हौसला नहीं टूटा। इस गोलीकांड में धमदाहा के 15 आंदोलनकारी शहीद हो गए, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए।
इन 15 वीर सपूतों ने दी थी शहादत
धमदाहा के शहीदों में श्रीनिवास पांडेय, जयमंगल सिंह, योगेंद्र नारायण सिंह, परमेश्वर दास, शेख इसहाक, लख्खी भगत, मोती मारकंडेय, बालो मारकंडेय, रामेश्वर पासवान, बाबूलाल मंडल, हेम नारायण यादव, भागवत महतो, बालेश्वर पासवान, कुसुमलाल आर्य और किंजर धानुक के नाम प्रमुख रूप से लिए जाते हैं।
धमदाहा थाना उस दौर में अंग्रेजी प्रशासन का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता था। वर्ष 1942 के आंदोलन के दौरान इसी थाना को अंग्रेजी शासन के प्रतीक के रूप में आंदोलनकारियों ने चुनौती दी थी।
25 अगस्त को मनाया जाता है शहीद दिवस
हर साल 25 अगस्त को धमदाहा के ऐतिहासिक क्रीड़ा मैदान स्थित शहीद स्मारक पर शहीद दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर तिरंगा फहराया जाता है और अमर शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी जाती है।
कार्यक्रम में स्वतंत्रता सेनानी परिवारों के सदस्य, प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल होते हैं। लोग शहीद स्मारक पर पहुंचकर उन वीर सपूतों को नमन करते हैं, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया।
वर्ष 2023 में धमदाहा के शहीद दिवस समारोह को राजकीय दर्जा मिलने के बाद कार्यक्रम का आयोजन सरकारी स्तर पर भी किया जाने लगा। इसके बाद हर वर्ष प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की सहभागिता से भव्य समारोह आयोजित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है।
धमदाहा के इन शहीदों की कहानी सिर्फ इतिहास का एक पन्ना नहीं है। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए साहस, संघर्ष, देशभक्ति और त्याग की प्रेरणा है। 25 अगस्त को पूरा धमदाहा उन अमर सपूतों को याद करता है, जिनके बलिदान ने स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में इस धरती का नाम हमेशा के लिए दर्ज कर दिया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button