हाथियों का खूनी तांडव, महिला को पटक-पटक कर मार डाला, गांव में दहशत का माहौल – नवादा ।

रवीन्द्र नाथ भैया ।
जिले के गोविंदपुर प्रखंड थाली थाना क्षेत्र के माधोपुर गांव में बीती रात जंगली हाथियों के झुंड ने ऐसा कहर बरपाया कि पूरे इलाके में दहशत फैल गई। करीब 25 से 30 की संख्या में हाथियों के झुंड ने एक झोपड़ी नुमा घर पर धावा बोलते हुए 55 वर्षीय महिला की दर्दनाक तरीके से जान ले ली, वहीं कई बीघा गेहूं की फसल और एक घर को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।मृतक महिला की पहचान माधोपुर निवासी ब्रह्मदेव प्रसाद यादव की 55 वर्षीय पत्नी मुन्ना देवी के रूप में हुई है। घटना गांव के बैहराडीह इलाके की है, जहां देर रात हाथियों का झुंड खेतों की ओर पहुंच गया।

परिजनों के अनुसार, मुन्ना देवी अपने पति के साथ गेहूं फसल की रखवाली के लिए खेत के पास बनी झोपड़ी में थीं तभी अचानक हाथियों का झुंड वहां आ धमका। जान बचाने के लिए दोनों भागने लगे, लेकिन इसी दौरान हाथियों ने मुन्ना देवी को घेर लिया और बेरहमी से पटक-पटक कर मार डाला। यह मंजर इतना भयावह था कि देखने वालों की रूह कांप उठी।
पति ब्रह्मदेव प्रसाद यादव ने बताया कि वह किसी तरह अपनी जान बचाकर भाग निकले, लेकिन उनकी पत्नी हाथियों के बीच फंस गईं और उनकी मौके पर मौत हो गई।
घटना की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।
इधर, हाथियों का उत्पात यहीं नहीं रुका। झुंड ने गांव के शिवालक यादव का मिट्टी का घर भी ध्वस्त कर दिया और कई किसानों की खड़ी गेहूं की फसल को रौंद डाला, जिससे भारी नुकसान हुआ है।
ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना वन विभाग और स्थानीय थाना को दी।
मौके पर पहुंची पुलिस और वन विभाग की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ा। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया है। बुधवार की सुबह लगभग 9 बजे शव गांव पहुंचते ही मातम छा गया परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है।
इसके पूर्व रविवार की रात्रि मे हाथियों ने कारु मांझी समेत दो लोगों की घर को ध्वस्त कर कई विगहा गेहूं की फसल बर्बाद कर दिया था।
लगातार हो रहे हाथियों के हमले से ग्रामीणों में दहशत के साथ-साथ आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि वन विभाग की लापरवाही के कारण आए दिन ऐसी घटनाएं हो रही हैं, लेकिन वन विभाग द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।
सबसे बड़ी बात यह है कि आखिर कब तक जंगली हाथियों का यह आतंक यूं ही निर्दोष लोगों की जान लेता रहेगा? क्या प्रशासन समय रहते कोई ठोस समाधान निकालेगा, या यूं ही गांव वाले डर के साये में जीने को मजबूर रहेंगे?



