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उपभोक्ताओं पर दोहरी मार, बालू के साथ ईंट भी महंगा – नवादा ।

रवीन्द्र नाथ भैया ।
जिले के उपभोक्ताओं को दोहरी मार झेलनी पढ़ रही है। बालू के साथ ईंटों की कीमत बढ़ने से मकान बनाने वाले लोगों के सामने महंगाई का संकट आ खड़ा हुआ है। ईंट की कीमतों में दोगुना तक इजाफे ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। ईंट की नई कीमत 10 हजार रुपये प्रति हजार तक जा पहुंची है। इससे पूर्व जिले में ईंट की कीमत 6 हजार रुपये के करीब थी।
ईंट की कीमत बढ़ने के पीछे यों तो कई कारण बताये जा रहे हैं। परंतु हाल के दिनों में सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है कोयले की बढ़ी कीमत। कोयले की एक किस्म की कीमत 6 हजार से बढ़कर 12 हजार रुपये प्रति टन और दूसरे की कीमत 9 से 18 हजार रुपये पर पहुंच गयी है। इसके कारण ईंटों की लागत पर दो गुना खर्च आ रहा है।
जीएसटी की बढ़ी दरें से परेशानी:-
ईंटों की कीमत बढ़ने के पीछे वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की नई दर का भी येागदान बताया जा रहा है। सरकार ने 01 अप्रैल 2022 से ईंटों पर जीएसटी 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दिया है।
ईंट भट्ठा कारोबारियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के बिना 6 प्रतिशत जीएसटी देने के लिए एक समग्र (कंपोजीशन) योजना चुनने का विकल्प दिया गया है। विकल्प नहीं चुनने पर उन्हें आईटीसी के साथ 12 प्रतिशत जीएसटी देना होगा। टैक्स की बढ़ी दरों का असर सीधा ईंटों के कारोबार पर पड़ रहा है,जिससे ईंट की कीमतों में इजाफा हुआ है।
बेमौसम की मार ने तोड़ी कमर:-
ईंट कारोबारियों को पिछले साल से अभी तक लगातार मौसम की मार झेलनी पड़ रही है। हर माह बिना मौसम के हो रही बारिश ने ईंटों के कारोबार को खासा नुकसान पहुंचाया।
बारिश के कारण करोड़ों लागत की कच्ची ईंटें पानी में बह गयी। इनकी जगह दोबारा ईंटें तैयार नहीं की जा सकीं। ईंटों के बर्बाद होने से इसकी लागत काफी हद तक प्रभावित हुई। इसकी भरपाई बढ़ी कीमतों से पूरी की जा रही है।
बालू की मार से पहले ही त्रस्त हैं उपभोक्ता:-
जिले के उपभोक्ता पहले से ही बालू संकट का खामियाजा भुगत रहे हैं। जिले में 01 जनवरी 2022 से नदियों से बालू का खनन पूरी तरह से बंद है। पर्यावरणीय प्रमाणपत्र नहीं मिलने के कारण नये निविदा धारक द्वारा जिले में खनन का कार्य शुरू नहीं किया जा सका। जिसके कारण जिले में बालू का संकट गहराया हुआ है। दूसरे जिलों से बालू मंगवाने में उपभोक्ताओं को दोगुना कीमत चुकानी पड़ रही है। कालाबाजारी कर बेचा जा रहा बालू भी काफी महंगा पड़ रहा है।
कहते हैं संघ के सचिव:-
ईंटों के कारोबारी तीन तरह की मार झेल रहे हैं। कोयले की कीमत के साथ जीएसटी बढ़ने का असर ईंटों पर पड़ा है। इसके अलावा प्रकृति की मार से कारोबार काफी प्रभावित हुआ। करोड़ों की कच्ची ईंटे बारिश में बर्बाद हो गयी। कारोबार को जीवित रखने के लिए ईंटों की कीमतों में बढ़ी दरों के अनुपात में वृद्धि की गयी है। लोगों के लिए ईंट आसानी से सुलभ दर पर उपलब्ध है।
– सतीश कुमार, सचिव,जिला, ईंट निर्माता व बिक्रेता संघ

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