
बिहार में कर्ज के बदले जान देने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. कटिहार के बाद अब नवादा में भी एक हंसते-खेलते परिवार ने अपनी जिंदगी खत्म कर ली. प्रदेश में गुंडा बैंक की जांच रफ्तार धीमी हुई तो क्रूर महाजनों के भी पंख फड़फड़ाने लगे हैं.
सूद के पैसे से जुड़े विवाद में हुए कटिहार के ट्रिपल मर्डर मामले में हाईकोर्ट ने सूदखोरों पर नकेल कसने के लिए जांच का आदेश दिया था. एसआइटी के गठन के बाद ताबड़तोड़ छापेमारी भी अचानक तेज हो गयी थी. कई धनाढ्य लोग जांच एजेंसियों के रडार पर भी चढ़े. लेकिन अब जांच जब सुस्त पड़ी तो प्रताड़ना और आत्महत्याओं का दौर फिर एकबार तेज होने लगा है.
हंसते-खेलते परिवार की जिंदगी तबाह:-
पटना हाईकोर्ट ने कटिहार के युवा व्यवसायी मनीष झा, उनकी पत्नी व मासूम के मौत मामले पर सुनवाई करते हुए बेहद सख्त निर्देश दिये थे. जिन्होंने सूदखोरों से तबाह होकर अपनी जिंदगी खत्म कर ली थी. अदालत ने तब सूदखोरों पर कड़ी कार्रवाई के आदेश देते हुए एसआइटी का गठन करवाया था. उसके बाद ताबड़तोड़ छापेमारी भी हुई. लेकिन सूदखोरों के ऊपर इसका कोई खौफ नहीं दिख रहा.
धनाढ्य सूदखोरों का मनोबल बढ़ने लगा:-
एकतरफ जहां गुंडा बैंक की जांच की रफ्तार अब धीमी पड़ गयी वहीं सूद के पैसे से आत्महत्या के नौबत तक पहुंचाने वाले धनाढ्य सूदखोरों का मनोबल बढ़ने लगा है. नवादा में भी एक हंसते-खेलते परिवार के सभी सदस्यों ने इन दरिंदों से तंग आकर अपनी जिंदगी का अध्याय समाप्त कर लिया.
कर्ज से तंग आकर पूरे परिवार ने जहर खाया:-
नवादा में केदार प्रसाद ने अपनी पत्नी, बेटे व बेटियों के साथ जहर खाकर जिंदगी समाप्त कर ली. मामला कर्ज के तले दबे होने और महाजनों के द्वारा कर्ज चुकाने का लगातार दबाव बनाने से जुड़ा मिला. दम तोड़ने से पहले कारोबारी व उसके परिवार ने साफ शब्दों में बताया कि कर्ज लेने के बाद उनकी जिंदगी तबाह होने लगी. सुसाइड नोट में भी लिखा मिला कि कारोबारी ने जितना कर्ज लिया उससे दोगुना-तिनगुना सूद चुका चुका था. लेकिन उसके बाद भी कर्ज के पैसे को लेकर महाजनों के द्वारा लगातार प्रताड़ित किया गया. अंतत: तीन बेटी, एक बेटा और पत्नी के साथ कारोबारी ने आत्महत्या कर लिया.
गुंडा बैंक मामले की जांच पड़ी ठंडी:-
गुंडा बैंक मामले की जांच तेज हुई थी तो भागलपुर में इनकम टैक्स का सबसे बड़ा छापा पड़ा था. निवर्तमान डिप्टी मेयर राजेश वर्मा समेत कई धनाढ्यों के ठिकानों पर लगातार चार दिनों तक छापेमारी हुई थी. अकूत संपत्ति के दस्तावेज वगैरह भी सीज हुए.
मामला ईडी के टेबल तक पहुंचा लेकिन उसके बाद मामला ठंडा पड़ गया. जिसके बाद प्रदेश में अब अचानक वो खौफ भी सूदखोरों के अंदर से खत्म होता दिखने लगा. जिसका खामियाजा उनके जाल में फंसे मजबूर परिवारों को भुगतना पड़ रहा है.