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साढ़े चार माह में बालू खनन बंद रहने 32 करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व का नुकसान – नवादा |

रवीन्द्र नाथ भैया |

जिलेभर में नदी घाटों से बालू खनन एक जनवरी से ठप है। साढ़े चार माह से अधिक समय बीत चुका है। नए संवेदक जिन्हें टेंडर मिला है उन्हें पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं मिली है। इस कारण नदी घाटों पर बालू खनन का काम ठप है। खनन नहीं होने से करोड़ों रुपये राजस्व की क्षति सरकार को हो रही है। बिहार सरकार द्वारा 19 दिसंबर 2021 को नवादा के बालू घाटों की निविदा कराई गई थी। सबसे ऊंची बोली लगाने वाले एकलव्य स्टोन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के नाम निविदा हुई थी।
जिला खनन विभाग कार्यालय के अनुसार पर्यावरणीय स्वीकृति व बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र अब तक निर्गत नहीं हुआ है। इसके कारण जिले में बालू खनन शुरू नहीं हो सका है। वहीं नदी घाटों से बालू का अवैध खनन जारी है।
बालू के अवैध खनन पर रोक लगाने के क्रम में खनन विभाग की टीम पर बालू तस्करों द्वारा हमला भी हो चुका हैं। हाल के दिनों में वारिसलीगंज, नरहट, सिरदला आदि इलाकों में खनन विभाग की टीम पर हमला किया गया था।
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45 करोड़ 86 लाख में हुई
है निविदा
– बिहार राज्य खनिज संशोधित नियमावली के तहत 19 दिसंबर 2021 को नवादा बालू घाट की निविदा कराई गई थी। सबसे उंची बोली 45 करोड़ 86 लाख लगाकर एकलव्य स्टोन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने छह माह के लिए निविदा अपने नाम की थी। इसके पूर्व नवादा में बालू घाटों की निविदा छह माह के लिए 17 करोड़ 86 लाख रुपये में जय माता दी इंटरप्राइजेज के नाम से थी। मार्च में निविदा समाप्त होना था। लेकिन दिसंबर में ही नए सिरे से टेंडर करा दिया गया। नई निविदा 1 जनवरी से 30 जून 2022 तक छह माह के लिए की गई है। जिसमें साढ़े चार माह का समय बीत चुका है।
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59 बालू घाटों की हुई है नीलामी
– जिले के विभिन्न नदियों में 59 सरकारी बालू घाट का संचालन हो रहा है। लेकिन पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं मिलने से बालू खनन व उठाव कार्य ठप पड़ा है। सभी बालू घाट को सील कर दिया गया है। हालांकि चोरी छिपे बालू का खनन दिन-रात जारी है।
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करीब 32 करोड़ 26 लाख राजस्व का नुकसान
– जिला खनन विभाग के अधिकारी के मुताबिक दिसंबर 2021 तक बालू खनन से प्रतिमाह करीब 3 करोड़ रुपये सरकारी राजस्व प्राप्त हो रहा था। नई निविदा से करीब 8 करोड़ रुपये प्रतिमाह राजस्व आना था। इस हिसाब से 13 मई तक करीब 32 करोड़ 26 लाख रुपये सरकारी राजस्व का नुकसान हो चुका है। पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं मिलने के कारण अबतक बालू खनन ठप पड़ा है।

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