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साहित्यकार एवं पूर्व जिला शिक्षा पदाधिकारी डॉ. कैलाश प्रसाद सिंह के निधन पर साहित्य जगत में शोक – नवादा |

जिले के वारिसलीगंज प्रखंड क्षेत्र के बाली गांव निवासी प्रसिद्ध साहित्यकार, संस्कृत, हिंदी एवं मैथिली भाषाओं के विद्वान तथा कवि डॉ. कैलाश प्रसाद सिंह का 93 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से साहित्य जगत सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
डॉ. सिंह पूर्व जिला शिक्षा पदाधिकारी रहे और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
डॉ. कैलाश प्रसाद सिंह अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके परिजनों एवं जानने वालों में गहरा दुख व्याप्त है। परिवारजन शोक में डूबे हुए हैं। उनका अंतिम संस्कार पटना के गुल्बी घाट पर पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ संपन्न हुआ, जहां सैकड़ों लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी।
डॉ. सिंह जीवनपर्यंत साहित्य सृजन से जुड़े रहे। उन्होंने कई पुस्तकों की रचना की, जिनमें उल्लेखनीय हैं अनुभवामि दिने दिने तथा उत्तम सर्व धर्माणाम। वे गोल्ड मेडलिस्ट विद्वान थे और हिंदू धर्म के संरक्षक के रूप में जाने जाते थे।
शिक्षा प्रशासन में जिला शिक्षा पदाधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं देने के साथ-साथ वे साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय रहे। स्वर्गीय डॉ. सिंह जदयू के वरिष्ठ नेता छोटू सिंह के दादाजी थे। उनके निधन पर क्षेत्रवासियों, बुद्धिजीवियों एवं मित्रों ने गहरा शोक व्यक्त किया। श्रद्धांजलि सभा में नोनी पंचायत के मुखिया सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
ई. गौतम सिंह, मधुरेंद्र, मनोज, अमरेश, अशोक, त्रिपुरारी आदि ने शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देते हुए डॉ. सिंह को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। डॉ. कैलाश प्रसाद सिंह का निधन बिहार के साहित्य एवं शिक्षा जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उनकी स्मृति में क्षेत्रवासी हमेशा उन्हें याद रखेंगे।

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