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डीएम उदिता सिंह ने छात्राओं से कहा— “संघर्ष से मत डरिए, जो जितना तपता है, उतना ही चमकता है”; वोकेशनल ट्रेनिंग शुरू कराने के दिए निर्देश ..नालन्दा ।

रवि रंजन ।

फाइलों से नहीं, सपनों से गूंजा डीएम ऑफिस… नालंदा की बेटियों को मिला सफलता का मंत्र …

नालन्दा ज़िला मुख्यालय बिहार शरीफ का नालंदा समाहरणालय का माहौल रोज़ जैसा नहीं था। जहां आमतौर पर प्रशासनिक फैसलों और सरकारी बैठकों की गूंज रहती है, वहीं इस बार मासूम सवाल, बड़े सपने और आत्मविश्वास से भरी आवाज़ें सुनाई दे रही थीं। मौका था ‘ *बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ* ‘ अभियान के तहत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, कमरुद्दीनगंज (बिहारशरीफ) की छात्राओं के शैक्षणिक भ्रमण का।
जिला पदाधिकारी उदिता सिंह ने छात्राओं से औपचारिक नहीं, बल्कि एक बड़े मार्गदर्शक की तरह संवाद किया। उन्होंने हर छात्रा से उसका सपना पूछा और बताया कि सपनों को सच करने के लिए सबसे ज़रूरी है मेहनत, अनुशासन और खुद पर भरोसा।
बातचीत के दौरान डीएम उदिता सिंह ने छात्राओं को सबसे पहले अपनी बात खुलकर रखने की सीख दी। उन्होंने कहा कि ” *सहना नहीं,* कहना है। जब तक आप अपनी बात नहीं रखेंगी, तब तक आपकी जरूरत और परेशानी किसी को पता नहीं चलेगी।” उन्होंने महिला हेल्पलाइन 181 और आपातकालीन सेवा 112 की जानकारी देते हुए कहा कि अधिकारों की जानकारी ही सशक्त बनने की पहली सीढ़ी है।


जब एक छात्रा ने पूछा कि ” *मैडम, आप आईएएस कैसे बनीं?”*
तो डीएम ने अपने जीवन का संघर्ष साझा किया। उन्होंने बताया कि उनका पहला सपना इंजीनियर बनने का था। आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की। कई बार ऐसा लगा कि साथी आगे निकल गए हैं, लेकिन उन्होंने धैर्य नहीं छोड़ा और आखिरकार भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित होकर अपना लक्ष्य हासिल किया।
छात्राओं को प्रेरित करते हुए डीएम ने कहा कि “जो जितना तपता है, उतना ही चमकता है। संघर्ष कभी बोझ नहीं होता, बल्कि वही इंसान को मजबूत बनाता है। सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता।” उन्होंने भगवान श्रीराम और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संघर्ष का उदाहरण देते हुए कहा कि कठिनाइयों से घबराने के बजाय उनका सामना करना चाहिए।
संवाद के दौरान छात्राओं ने विद्यालय में सिलाई-कढ़ाई, ब्यूटी एंड वेलनेस, नृत्य और संगीत की नियमित कक्षाएं शुरू कराने की मांग रखी।
डीएम ने इस पर तुरंत संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए और कहा कि शिक्षा के साथ कौशल विकास भी उतना ही जरूरी है, ताकि बेटियां भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें।
कार्यक्रम के अंत में छात्राओं ने संकल्प लिया कि वे अपने माता-पिता, विद्यालय, नालंदा और देश का नाम रोशन करेंगी। इसके बाद उन्हें पुलिस कंट्रोल रूम, व्यवहार न्यायालय, वन स्टॉप सेंटर, लोक शिकायत निवारण कार्यालय और आरटीपीएस सहित कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों का भ्रमण कराया गया, जहां उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था को करीब से समझा।
यह शैक्षणिक भ्रमण केवल सरकारी कार्यालयों को देखने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नालंदा की बेटियों के लिए बड़े सपने देखने, आत्मविश्वास से आगे बढ़ने और अपने भविष्य को नई दिशा देने का प्रेरणादायक अनुभव बन गया।

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