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शिलान्यास के बाद भी वर्षों से अधूरी पड़ी हैं 3 मुख्य सड़कें, आंदोलन की हो रही तैयारी! – नवादा  |

नवादा :  जिले में मॉनसून की आहट से पहले ही अकबरपुर प्रखंड क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में बुनियादी ढांचे और सड़कों की बेहद शर्मनाक तस्वीर सामने आ रही है। रविवार को हुई हल्की सी बारिश के बाद ही क्षेत्र की प्रमुख ग्रामीण सड़कों की जर्जर और बदहाल स्थिति पूरी तरह उजागर हो गई ।
हालात इतनी खौफनाक हो चुकी है कि इन सड़कों पर चलना मौत को दावत देने जैसा जोखिम भरा साबित हो रहा है। गड्ढों में तब्दील हो चुकी इन सड़कों से नाराज ग्रामीणों की सुध लेने जब कोई अधिकारी नहीं पहुंचा, तो अब लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ उग्र आंदोलन की रूपरेखा तैयार करनी शुरू कर दी है।
नेताओं के वादे सिर्फ शिलान्यास तक सीमित, वर्षों बाद भी नहीं शुरू हुआ काम:-
अकबरपुर प्रखंड के दर्जनों गांवों को जोड़ने वाली इन सड़कों की लगातार हो रही उपेक्षा से ग्रामीण बेहद आक्रोशित हैं। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि कई महत्वपूर्ण सड़कों के निर्माण कार्य को लेकर तत्कालीन पथ निर्माण मंत्री (बिहार सरकार) सह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नवीन नितिन के द्वारा बकायदा शिलान्यास किया गया था, लेकिन सरकार और विभाग की उदासीनता का आलम यह रहा कि मामला केवल वीआईपी शिलान्यास वाले शिलापट्ट (पत्थर) तक ही सिमट कर रह गया। शिलान्यास के वर्षों बीत जाने के बावजूद आज तक धरातल पर निर्माण कार्य की एक ईंट भी नहीं रखी जा सकी, जिससे लोगों में भारी आक्रोश है।
तीन प्रमुख पथों की हालत है सबसे ज्यादा जानलेवा, रोजाना सफर कर रहे हजारों लोग:-
ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र की तीन सबसे महत्वपूर्ण सड़कें इस वक्त पूरी तरह जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं। इनमें ‘गोपालपुर मोड़ से मानेबिगहा मार्ग’, ‘गांव से गोपालपुर गांव मुख्य मार्ग’ और ‘बरेब मोड़ से नेमदारगंज मोड़ होते हुए मंझवे गोविंदपुर तक की सड़क’ शामिल हैं। ये सभी मार्ग मुख्य हाईवे को सुदूर ग्रामीण इलाकों से जोड़ती हैं, जिससे प्रतिदिन हजारों लोग, स्कूली बच्चे और मरीज आवागमन करते हैं। सड़कों पर जगह-जगह इतने बड़े और गहरे गड्ढे उभर आए हैं कि दोपहिया वाहन चालक हिचकोले खाते हुए गिरकर चोटिल हो रहे हैं। कई स्थानों पर तो पैदल चलना भी पूरी तरह दूभर हो चुका है।
15 टन की सड़क पर चल रहे ओवरलोडेड ट्रक:-
पूरे विवाद और सड़कों की बदहाली पर ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमण्डल रजौली के कार्यपालक अभियंता (Executive Engineer) ने विभाग का पक्ष रखा है। उन्होंने एक बड़ी तकनीकी वजह बताते हुए कहा कि ‘अकबरपुर डेढ़गांव टू मानेबिगहा सड़क’ की क्षमता केवल 10 से 15 टन तक के हल्के और मध्यम वाहनों को झेलने लायक है।
लेकिन इस रूट पर लगातार गिट्टी-बालू लदे भारी और ओवरलोडेड वाहनों का परिचालन हो रहा है, जिसने सड़क को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है । इसी वजह से अब इस सड़क को ग्रामीण कार्य विभाग से हटाकर पथ निर्माण विभाग (RCD) में ट्रांसफर (स्थानांतरित) किया जा रहा है ताकि इसका बड़े पैमाने पर और मजबूत निर्माण कराया जा सके।
इधर ग्रामीणों ने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि वे अब विभागों के ट्रांसफर और कागजी दावों के झांसे में नहीं आने वाले हैं। अगर जल्द इन जानलेवा गड्ढों को भरकर पक्की सड़क का निर्माण शुरू नहीं कराया गया, तो पूरा प्रखंड क्षेत्र सड़कों पर उतरकर उग्र चक्का जाम करने को मजबूर होगा, जिसकी पूरी जवाबदेही जिला प्रशासन की होगी।

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