
रवि रंजन ।
नालंदा : लहेरी थाना पुलिस द्वारा तीन करोड़ रुपये के कथित जमीन धोखाधड़ी मामले में व्यवसायी नीतीश कुमार की गिरफ्तारी के बाद जांच प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। आरोपी के परिजनों ने पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई करने और वास्तविक आरोपी तक नहीं पहुंचने का आरोप लगाया है।
मामले में पुलिस ने व्यवसायी नीतीश कुमार को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
आरोपी के पिता प्रमोद सिंह ने मंगलवार को बताया कि शिकायतकर्ता बिरेंद्र कुमार ने उनके बेटे के खिलाफ जमीन बिक्री के नाम पर तीन करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया है। प्राथमिकी के अनुसार, बिरेंद्र कुमार ने जमीन खरीदने के लिए जितेंद्र कुमार नामक व्यक्ति को अलग-अलग किस्तों में तीन करोड़ रुपये का भुगतान किया था।
परिजनों का आरोप है कि जमीन सौदे के लिए फर्जी आधार कार्ड के जरिए जितेंद्र कुमार को असली जमीन मालिक बताकर प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने इस मामले में रुपये लेने वाले जितेंद्र कुमार की भूमिका की गहन जांच किए बिना उनके बेटे को गिरफ्तार कर लिया।
प्रमोद सिंह ने कहा, “यह समझ से परे है कि कोई व्यक्ति करोड़ों रुपये की जमीन खरीदते समय जमीन मालिक की पूरी जांच-पड़ताल नहीं करेगा। पुलिस को यह पता लगाना चाहिए कि रकम किसे और किन परिस्थितियों में दी गई।”
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ समय पहले बिरेंद्र कुमार अपने सहयोगियों के साथ हथियार के बल पर उनके घर में घुस आए थे और उनके बेटे से कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए थे। परिजनों का दावा है कि इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी उनके पास मौजूद है और इस संबंध में अलग से मामला दर्ज कराया गया है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
परिवार का आरोप है कि पुलिस ने दबाव में आकर एकतरफा कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि वे मामले में वरीय पुलिस अधिकारियों से शिकायत करेंगे और आवश्यक होने पर पटना उच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे।
वहीं, शिकायतकर्ता बिरेंद्र कुमार ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह सत्य हैं। उनका कहना है कि उनके पास मामले से जुड़े पर्याप्त साक्ष्य हैं और उनके साथ सुनियोजित तरीके से तीन करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई है।



