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1936 में स्थापित धमदाहा उच्च विद्यालय का गौरवशाली अतीत, वर्तमान में शिक्षा-हॉस्टल व्यवस्था बदहाल – धमदाहा / पूर्णिया |

धमदाहा / पूर्णिया : गुलाम देश में भी शिक्षा के जगत में अपनी पहचान स्थापित करने वाले शिक्षा भी उमाकांत झा जिन्होंने अपनी शिक्षा के बदौलत 1936 में धमदाहा उच्च विद्यालय का स्थापना किया इस दौरान उन्होंने अंग्रेजों से कितनी प्रताड़ित होना पड़ा होगा उसे समय के जो जीवित छात्र होंगे वहीं इस बात को बता दे सकते हैं लेकिन इसके बावजूद भी आज धमदाहा में आजादी से पहले इस विद्यालय का निर्माण हुआ और इन विद्यालयों से शिक्षा ग्रहण करने वाले देश-विदेश तक अपनी परचम लहरा चुके हैं आज हम इस उच्च विद्यालय की बात कर रहे हैं जो उच्च विद्यालय कभी उमाकांत झा के नाम से जाने जाते हैं तो 95 के 94 के दशक तक बलराम चौधरी के नाम से जाने जाते थे जहां एक से एक वीर विद्यालय ने योद्धा को शिक्षा के क्षेत्र में योद्धा को तैयार किए थे जिस तरह महाभारत रामायण में राम लक्ष्मण हनुमान की चर्चा होती है इस तरह से इस विद्यालय में आईएएस आईपीएस इंजीनियर प्रोफेसर डॉक्टर का नाम होता था यहां के छात्र खेल को संगीत शिक्षा हर चीज में अपनी एक दबदबा रखते थे
आजादी से पहले वर्ष 1936 में स्थापित उच्च विद्यालय धमदाहा का इतिहास गौरवशाली रहा है।
आजादी के बाद बिहार के टॉप-10 स्कूलों में इसका नाम आता था, वहीं जिले में यह तीसरे स्थान पर गिना जाता था। शिक्षा, खेलकूद, संगीत और पुस्तकालय के क्षेत्र में यहां के छात्र अव्वल आते थे।

*कभी IAS-IPS-डॉक्टर देता था ये विद्यालय
इस विद्यालय से पढ़कर निकले छात्र IAS, IPS, प्रोफेसर, डॉक्टर, इंजीनियर बने और NDA की ट्रेनिंग पूरी कर आज देश के कोने-कोने में उच्च पदों पर पदस्थापित हैं। राज्य के कोने-कोने तक उच्च विद्यालय धमदाहा का नाम शिक्षा के क्षेत्र में जाना जाता था।
तीन हॉस्टल थे, अब सिर्फ एक बचा
पहले इस विद्यालय में जनरल आवासीय छात्रावास, अनुसूचित जनजाति छात्रावास और मुस्लिम छात्रावास हुआ करते थे। वर्तमान में 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई के लिए सिर्फ अनुसूचित जनजाति छात्रावास संचालित है। जनरल छात्रों और मुस्लिम छात्रों के लिए छात्रावास की व्यवस्था नहीं है।
छात्रावास की जमीन पर अतिक्रमण
स्थानीय लोगों के अनुसार मुस्लिम छात्रावास की जमीन पर अतिक्रमण कर लिया गया है। अनुसूचित जनजाति छात्रावास में छात्र तो रह रहे हैं, लेकिन सुविधाओं का अभाव है।
90 के दशक के बाद से 2014 गतिविधियां ठप
90 के दशक के बाद 2014 तक विद्यालय में ऐसी कोई गतिविधि नहीं हुई है जिससे जिला या राज्य स्तर पर इसका नाम अव्वल हो।
लेकिन 2014 से अप्रैल के बाद विज्ञान शिक्षक संतोष कुमार के मार्गदर्शन में कभी तीन छात्रों ने राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाई ।
भवन तो बेशुमार, शिक्षा बदहाल
आज यह उच्च विद्यालय भवनों की गिनती में तो बेशुमार है, लेकिन शिक्षा व्यवस्था से लेकर आवासीय की व्यवस्था तक की स्थिति विकट बनी हुई है। लोगों के बीच चर्चा है कि कभी शिक्षा के क्षेत्र में अव्वल रहने वाला धमदाहा उच्च विद्यालय अब अपनी पहचान खो रहा है।

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